विशेषताएं : मौन साधना : मानसिक शांति एवं आंतरिक ऊर्जा के लिए नौ दिनों का अखंड मौन।

किडीयारू सेवा : मूक जीवों की सेवा के माध्यम से “जीव सेवा ही प्रभु सेवा” के सिद्धांत को साकार करना।

आहवा (डांग) : प्रकृति की गोद में बसे डांग जिले के वासुर्णा गांव में चैत्र मास के पावन अवसर पर आध्यात्मिकता और मानव सेवा का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है।

गुड़ी पड़वा के शुभ मुहूर्त से छोटे-छोटे जीवों के संरक्षण हेतु सूरत गौशाला मंडल द्वारा 1000 श्रीफल अर्पित कर विशेष सेवा कार्य का शुभारंभ किया गया।

सम्पूर्ण नवरात्रि के दौरान ब्रह्मवादिनी पूज्य हेतल दीदी द्वारा एक विशेष “मौन अनुष्ठान” का संकल्प लिया गया है, जिसकी शुरुआत ‘किडीयारू’ (चींटियों के लिए अन्न सेवा) पूरने के सेवायज्ञ से की गई। भक्ति और जीवदया के इस अनूठे समन्वय को योग, ध्यान और सत्संग के माध्यम से समझाया गया।भारतीय संस्कृति में चैत्र नवरात्रि का विशेष महत्व है।

इन दिनों शक्ति की उपासना के साथ आत्मशुद्धि के लिए मौन व्रत धारण करना अत्यंत कठिन साधना मानी जाती है। हेतल दीदी द्वारा नौ दिनों तक पूर्ण मौन रहकर ईश्वर की आराधना और उपासना करने का संकल्प लिया गया है।इसके साथ ही डांग की पावन भूमि पर ‘जीवदया’ के संदेश को साकार करते हुए किडीयारू सेवा अभियान चलाया जा रहा है। प्रतिदिन प्रातः निश्चित स्थानों पर चींटियों और अन्य सूक्ष्म जीवों के लिए अन्न अर्पित किया जा रहा है। इस सेवा के अंतर्गत लगभग 200 किलो बाजरे का आटा, 100 किलो बूरा शक्कर, 10 किलो घी, नारियल एवं बिस्किट का मिश्रण तैयार कर अर्पित किया जा रहा है। साथ ही जंगल में श्रीफल स्थापित कर वर्षा ऋतु तक जीवों के लिए भोजन की व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है।इस कार्यक्रम को सफल बनाने में दिनेशभाई, अमृतभाई, धनसुखभाई तथा तेजस्विनी संस्कृति परिवार के सदस्यों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया।

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