डांग, 16 जुलाई 2026 :

राज्य के अंतिम छोर पर स्थित डांग जिले से एक चिंताजनक मामला सामने आया है। गांधीनगर स्थित निदेशक, आदिजाति विकास विभाग द्वारा संचालित आदर्श आवासीय विद्यालयों में कार्यरत कर्मचारियों को पिछले चार महीनों से वेतन नहीं मिला है, जिसके कारण वे गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं।जिले के अत्यंत पिछड़े और दूरस्थ क्षेत्रों में स्थित आहवा, वघई तथा प्रसिद्ध पर्यटन स्थल सापूतारा में संचालित आदर्श आवासीय विद्यालयों के शिक्षक एवं अन्य कर्मचारी लगातार चार माह से बिना वेतन के अपनी सेवाएं दे रहे हैं। अचानक वेतन भुगतान रुक जाने से कर्मचारियों के लिए दैनिक जीवन की आवश्यकताओं को पूरा करना भी कठिन हो गया है।आदिजाति क्षेत्रों में शिक्षा के प्रसार और विद्यार्थियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित इन विद्यालयों के कर्मचारियों की स्थिति अब दयनीय बनती जा रही है। घर का राशन, दूध और सब्जियों जैसे दैनिक खर्चों से लेकर बच्चों की स्कूल फीस तथा बीमारी के समय चिकित्सा खर्चों का प्रबंध करने के लिए कर्मचारियों को कर्ज लेने तक की नौबत आ गई है।लगातार चार माह से वेतन की प्रतीक्षा कर रहे कर्मचारियों पर इसका मानसिक और आर्थिक दोनों स्तरों पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि वे पूरी निष्ठा और जिम्मेदारी के साथ अपनी सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन समय पर वेतन न मिलने के कारण उनका परिवार आर्थिक तंगी से गुजर रहा है।फिलहाल स्थानीय प्रशासन अथवा संबंधित विभाग की ओर से वेतन भुगतान में देरी के कारणों को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। इस स्थिति को लेकर कर्मचारियों में असंतोष और निराशा का माहौल व्याप्त है।आदर्श आवासीय विद्यालयों में कार्यरत कर्मचारियों ने प्रशासन और संबंधित विभाग से मांग की है कि उनका बकाया वेतन जल्द से जल्द जारी किया जाए, ताकि वे इस कठिन आर्थिक परिस्थिति से बाहर निकल सकें।

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