(डांग) आहवा : गुजरात प्राकृतिक कृषि विकास बोर्ड द्वारा डांग जिले के सभी किसानों को प्राकृतिक खेती के संबंध में प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसी क्रम में आज आहवा तालुका के पिपलघोड़ी गांव में किसानों के लिए प्राकृतिक खेती पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।
प्रशिक्षण के दौरान कृषि सखी बहनों ने देशी गाय के गोबर और गौमूत्र से तैयार किए जाने वाले जीवामृत और बीजामृत के उपयोग तथा उनके लाभों के बारे में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जीवामृत के उपयोग से मिट्टी में केंचुओं और लाभकारी सूक्ष्मजीवों की संख्या बढ़ती है, जिससे मिट्टी की गुणवत्ता और उर्वरता में सुधार होता है।
प्राकृतिक खेती पद्धति अपनाने से भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलता है तथा किसानों की उत्पादन लागत में उल्लेखनीय कमी आने से उनकी आय में वृद्धि संभव होती है।
प्रशिक्षण के दौरान किसानों को वर्षा के कारण होने वाले मिट्टी के कटाव को रोकने और भूमि में नमी बनाए रखने के लिए फसल अवशेषों द्वारा आच्छादन (मल्चिंग) करने की विधि के बारे में भी जानकारी दी गई। यह पद्धति मिट्टी में नमी बनाए रखने के साथ-साथ खरपतवार नियंत्रण में भी प्रभावी सिद्ध होती है।
इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य किसानों को प्राकृतिक खेती पद्धति अपनाने के लिए प्रेरित करना, उत्पादन लागत कम करना तथा दीर्घकाल तक भूमि की उर्वरता को सुरक्षित बनाए रखना है।

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