डांग | संवाददाताडांग जिले के प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर सापुतारा पूर्णा कैंप साइट पर आनंद आश्रम डांग द्वारा योगी अरुणानंद मुनि के मार्गदर्शन में एक दिवसीय ध्यान एवं योग शिविर का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया।

शिविर में बड़ी संख्या में साधकों, योग-प्रेमियों एवं प्रकृति प्रेमियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर विभिन्न आध्यात्मिक, योगिक एवं प्राणशक्ति-वर्धक अभ्यासों का लाभ प्राप्त किया।शिविर का शुभारंभ ताईची क्लैपिंग (Tai Chi Clapping) अभ्यास से हुआ। इस दौरान प्रतिभागियों को ताली के माध्यम से शरीर की नाड़ियों को सक्रिय एवं संतुलित करने की सरल तथा प्रभावी विधि का अभ्यास कराया गया।

इसके पश्चात प्रतिभागियों को वृक्षों की ऊर्जा ग्रहण करने का विशेष अभ्यास कराया गया। इस दौरान योगी अरुणानंद मुनि ने बताया कि प्रकृति एवं वृक्षों के साथ सकारात्मक ऊर्जा का संबंध स्थापित कर शरीर, मन और प्राणशक्ति को अधिक सशक्त एवं ऊर्जावान बनाया जा सकता है।शिविर का प्रमुख आकर्षण महर्षि अगस्त्य द्वारा वर्णित 64 मात्रा प्राणायाम रहा। योगी अरुणानंद मुनि ने इसकी सरल एवं व्यावहारिक विधि समझाते हुए बताया कि नियमित एवं सजग अभ्यास से मानसिक शांति, आंतरिक संतुलन, एकाग्रता तथा जीवन के लक्ष्यों की प्राप्ति में सहायता मिलती है।प्रतिभागियों को माइंडफुल वॉकिंग (जागरूकतापूर्वक चलने) का अभ्यास भी कराया गया, जिससे वर्तमान क्षण में जीने, मन को स्थिर रखने तथा आत्म-जागरूकता विकसित करने की प्रेरणा मिली।शिविर के दौरान कुंडलिनी जागरण एवं आत्मशुद्धि क्रिया का अभ्यास भी कराया गया। साथ ही ताईची (Tai Chi) की विशेष श्वास-प्रक्रिया सिखाई गई। योगी अरुणानंद मुनि ने बताया कि नियमित अभ्यास से शरीर के ऊर्जा केंद्रों (चक्रों) में उत्पन्न अवरोधों को दूर करने तथा ऊर्जा के संतुलित प्रवाह में सहायता मिलती है।अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में योगी अरुणानंद मुनि ने आत्मसाक्षात्कार के वास्तविक अर्थ, उसके महत्व तथा उसे प्राप्त करने के व्यावहारिक मार्ग पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि निरंतर साधना, प्राणायाम, ध्यान और आत्म-जागरूकता के माध्यम से प्रत्येक व्यक्ति अपने भीतर विद्यमान दिव्य चेतना का अनुभव कर सकता है।शिविर के समापन अवसर पर प्रतिभागियों ने इस प्रकार के आध्यात्मिक एवं योग आधारित आयोजनों को नियमित रूप से आयोजित करने की आवश्यकता व्यक्त की तथा सफल आयोजन के लिए आनंद आश्रम डांग एवं योगी अरुणानंद मुनि के प्रति आभार व्यक्त किया।

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