डांग : वलसाड-डांग के लोकप्रिय MP धवल पटेल ने पार्लियामेंट में पारंपरिक आदिवासी कपड़े पहनने के अपने फैसले पर दिल को छू लेने वाला बयान दिया है। उन्होंने साफ किया है कि यह कपड़ा उनके लिए सिर्फ एक ड्रेस नहीं है, बल्कि यह भारत के सबसे ऊंचे डेमोक्रेटिक प्लेटफॉर्म पर आदिवासी संस्कृति और पहचान को गर्व से पेश करने का एक अहम पल है। MP धवल पटेल ने कहा, “पार्लियामेंट में पारंपरिक आदिवासी कपड़े पहनना मेरे लिए सिर्फ एक ड्रेस नहीं है, बल्कि नेशनल स्टेज पर अपनी जड़ों, अपनी संस्कृति और अपनी पहचान को गर्व से पेश करने का एक पल है।” डांग और वलसाड जैसे आदिवासी बहुल इलाकों को रिप्रेजेंट करने वाले धवल पटेल के इस कदम को आदिवासी समुदाय के सम्मान और बेहतरी के साथ देखा जा रहा है। उन्होंने कहा, “यह कपड़ा हमारे आदिवासी समुदाय की समृद्ध विरासत और भारत की विविधता को एक ट्रिब्यूट है।” उन्होंने कहा कि देश की पार्लियामेंट में यह खास ड्रेस पहनना उनके लिए बहुत सम्मान की बात है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब नेशनल स्टेज पर रीजनल और कल्चरल पहचान दिखाने की अहमियत बढ़ रही है। वलसाड डांग के MP धवल पटेल की इस ड्रेस से लाखों आदिवासियों के कल्चरल वजूद का सम्मान हुआ है और उनकी परंपराओं को पहचान मिली है। MP आमतौर पर पार्लियामेंट में रेगुलर और फॉर्मल ड्रेस पहनते हैं, लेकिन धवल पटेल की चुनी हुई यह ट्रेडिशनल ड्रेस सिर्फ एक फैशन स्टेटमेंट नहीं है, बल्कि एक पावरफुल पॉलिटिकल और कल्चरल मैसेज है। यह ड्रेस इस बात का सिंबल है कि देश के हर कोने से डायवर्सिटी ही इंडियन डेमोक्रेसी की असली ताकत है। उनके इस कदम से न सिर्फ गुजरात बल्कि पूरे देश के आदिवासी समुदायों में गर्व की भावना पैदा हुई है। यह पहल दिखाती है कि इंडियन पॉलिटिक्स में अब लोकल और ट्रेडिशनल पहचान को भी नेशनल पॉलिसी और डेवलपमेंट के मुद्दों जितना ही महत्व दिया जा रहा है।

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