डांग : डांग जिले की सरकारी विनयन एवं वाणिज्य कॉलेज, वघई में आचार्य डॉ. जे.एम. भोया के मार्गदर्शन में सप्तधारा परियोजना अंतर्गत सृजनात्मक अभिव्यक्ति धारा के तहत एक दिवसीय “सृजनात्मक कार्यशिबिर” का आयोजन किया गया।कार्यक्रम का शुभारंभ भारतीय परंपरा अनुसार अतिथियों के कुमकुम तिलक, सरस्वती वंदना एवं दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। “मनुष्य तू बड़ा महान है” प्रार्थना द्वारा विद्यार्थियों में उत्साह का संचार किया गया तथा नृत्य के माध्यम से अतिथियों का स्वागत किया गया।इस सृजनात्मक कार्यशिबिर के उद्घाटक डॉ. जे.टी. चौधरी (सेवानिवृत्त प्राचार्य, सरकारी विनयन एवं वाणिज्य कॉलेज, वांकल) उपस्थित रहे। साथ ही डॉ. एच.जी. पटेल एवं मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. ठाकोर चौधरी की गरिमामयी उपस्थिति रही। अतिथियों का स्वागत कॉलेज प्राचार्य डॉ. जे.एम. भोया द्वारा पुष्पगुच्छ एवं स्वागत उद्बोधन से किया गया।प्राचार्य डॉ. भोया ने सृजनात्मक अभिव्यक्ति के माध्यम से नवसर्जन, विद्यार्थियों में छिपी सुषुप्त शक्तियों को उजागर करने तथा प्रकृति के सान्निध्य में रहकर कुछ नया सृजन करने के लिए प्रेरणादायी विचार प्रस्तुत किए।मुख्य अतिथि डॉ. ठाकोर चौधरी ने प्राकृतिक खेती एवं मधुमक्खी पालन के माध्यम से स्वस्थ जीवन और सृजनात्मक अभिव्यक्ति के साथ आगे बढ़ने के लिए विद्यार्थियों को प्रेरित किया।कार्यक्रम के अध्यक्ष डॉ. हितेशभाई पटेल ने अपने संबोधन में प्रकृति से जुड़ाव, सृजनात्मकता को विचारों की कविता बताते हुए विद्यार्थियों को अपने विचारों की अभिव्यक्ति एवं अंतर्निहित शक्तियों को जागृत करने के लिए मार्गदर्शन दिया।उद्घाटक डॉ. जे.टी. चौधरी ने कहा कि कक्षा की चार दीवारों के बाहर का शिक्षण भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने प्रकृति के सान्निध्य में रहकर नवसृजन करने और सृजनात्मकता को विकसित करने पर बल दिया।इस सृजनात्मक कार्यशिबिर का सफल आयोजन सप्तधारा अध्यक्ष डॉ. प्रीति पटेल, IQAC को-ऑर्डिनेटर प्रा. राकेशभाई नायका, सृजनात्मक अभिव्यक्ति धारा अध्यक्ष डॉ. अक्षयभाई बागुल, सहयोगी प्राध्यापकों एवं नॉन-टीचिंग स्टाफ के सहयोग से संपन्न हुआ। विद्यार्थियों ने स्वरचित कविताएं, गीत, किला इतिहास तथा पत्तों से बनी विभिन्न कलाकृतियों के माध्यम से अपनी प्रतिभा प्रस्तुत की। अंत में राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया।
