डांग, 24 फरवरी 2026 : ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत के प्रतीक डांग दरबार-2026 के आयोजन को लेकर जिले में राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। वर्षों से चली आ रही परंपरा और संवैधानिक प्रोटोकॉल के उल्लंघन के आरोपों के बीच डांग जिला कांग्रेस अध्यक्ष स्नेहल ठाकरे ने राज्य सरकार और जिला प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।डांग दरबार, जो आदिवासी संस्कृति और डांग के पांच राजपरिवारों के सम्मान का प्रतीक है, उसका उद्घाटन परंपरागत रूप से राज्य के प्रथम नागरिक यानी राज्यपाल के करकमलों से किया जाता रहा है। किंतु इस वर्ष 26 फरवरी से प्रारंभ होने वाले डांग दरबार-2026 की आधिकारिक आमंत्रण पत्रिका में उद्घाटन समारोह जिले के प्रभारी मंत्री जयरामभाई गामीत के हाथों आयोजित करने का उल्लेख किया गया है। जबकि राज्यपाल को केवल 2 मार्च को समापन समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में स्थान दिया गया है।इस निर्णय को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष स्नेहल ठाकरे ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि संवैधानिक प्रोटोकॉल के अनुसार राज्यपाल का पद किसी भी मंत्री से उच्च एवं गरिमामय होता है। ऐसे में जब राज्यपाल स्वयं कार्यक्रम में उपस्थित रहने वाले हों, तो उनके स्थान पर किसी मंत्री से उद्घाटन कराना न केवल प्रोटोकॉल का उल्लंघन है, बल्कि राज्य के सर्वोच्च संवैधानिक पद का अपमान भी है।उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार अपने मंत्रियों को प्रचार देने के उद्देश्य से डांग की ऐतिहासिक परंपराओं से खिलवाड़ कर रही है। डांग दरबार का मूल उद्देश्य डांग के राजपरिवारों का सम्मान करना है, लेकिन इस प्रकार के निर्णय से राजपरिवारों की भावनाएं आहत हो रही हैं और लोकतांत्रिक मूल्यों को ठेस पहुंच रही है।स्नेहल ठाकरे ने जिला प्रशासन से सवाल किया है कि क्या संबंधित अधिकारी संवैधानिक प्रोटोकॉल से अनभिज्ञ हैं या फिर राजनीतिक दबाव में इस प्रकार का आयोजन किया जा रहा है? उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि डांग दरबार कोई साधारण मेला नहीं, बल्कि डांग की अस्मिता, इतिहास और परंपरा से जुड़ा गौरवशाली पर्व है, जिसकी मर्यादा बनाए रखना अनिवार्य है।अंत में कांग्रेस अध्यक्ष ने चेतावनी दी है कि यदि तत्काल प्रभाव से कार्यक्रम में संशोधन कर राज्यपाल के करकमलों से उद्घाटन की परंपरा बहाल नहीं की जाती, तो कांग्रेस पार्टी डांग दरबार-2026 का पूर्ण बहिष्कार करेगी।अब देखना यह है कि इस गंभीर विवाद पर जिला प्रशासन और राज्य सरकार क्या रुख अपनाते हैं।
