डांग : प्रकृति की अमूल्य धरोहर माने जाने वाले डांग जिले के पूर्णा वन्यजीव अभयारण्य से पक्षी प्रेमियों के लिए एक अत्यंत उत्साहजनक समाचार सामने आया है। हाल ही में वन्यजीव भ्रमण के दौरान यहां एक अत्यंत दुर्लभ पक्षी प्रजाति ‘ब्लैक-हेडेड बंटिंग’ (Black-headed Bunting) देखी गई है। इस पक्षी का वैज्ञानिक नाम Emberiza melanocephala है।डांग के जंगलों में इस प्रजाति की उपस्थिति बहुत ही कम देखने को मिलती है। ऐसे में यह अवलोकन स्थानीय जैव विविधता के दस्तावेजीकरण की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

पूर्णा वन्यजीव अभयारण्य के प्रमाणित पर्यटक गाइड एवं महाल गांव के स्थानीय निवासी विपुल वळवी द्वारा इस दुर्लभ पक्षी का अवलोकन किया गया।विपुल वळवी लंबे समय से वन्यजीव क्षेत्र में सक्रिय हैं और दुर्लभ पक्षी प्रजातियों तथा उनके आवास की पहचान में उन्हें विशेष दक्षता प्राप्त है। वन्यजीव भ्रमण के दौरान जब वे जंगल के निर्धारित मार्ग पर थे, तभी उनकी नजर इस विशिष्ट पक्षी पर पड़ी। हालांकि यह दृश्य कुछ ही क्षणों का था, लेकिन पक्षी के विशिष्ट शारीरिक लक्षणों और व्यवहार के आधार पर इसकी पहचान आत्मविश्वास के साथ की गई। इसके साथ ही इस दुर्लभ क्षण का फोटोग्राफिक दस्तावेजीकरण भी किया गया है, जिसे इसकी आधिकारिक पुष्टि के लिए मजबूत प्रमाण माना जा रहा है।डांग जिले में ‘ब्लैक-हेडेड बंटिंग’ जैसी दुर्लभ प्रजाति का दिखाई देना पूर्णा वन्यजीव अभयारण्य के पारिस्थितिक महत्व को दर्शाता है। विशेषज्ञों के अनुसार यह पक्षी प्रवासी प्रजातियों में शामिल है और इसकी मौजूदगी इस बात का प्रमाण है कि पूर्णा का जंगल प्रवासी पक्षियों के लिए अनुकूल वातावरण और सुरक्षित आवास प्रदान करता है।इस अवलोकन को अब स्थानीय वन अधिकारियों और पक्षी विशेषज्ञों के साथ सत्यापन के लिए साझा किया गया है, ताकि इसे आधिकारिक वन्यजीव रिकॉर्ड में शामिल किया जा सके। डांग के घने जंगलों में इस तरह की नई और दुर्लभ खोजें पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ पर्यटन की दृष्टि से भी अत्यंत लाभकारी सिद्ध होंगी। विपुल वळवी जैसे स्थानीय युवाओं के प्रयासों से डांग की छिपी हुई जैव विविधता आज सामने आ रही है, जो वन विभाग के लिए भी गर्व की बात है।

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