दिनांक : 26 नवंबर 2025 : कहा जाता है कि महात्मा गांधी के गुजरात में शराब पर पूरी तरह से बैन है।लेकिन गुजरात का डांग जिला, जो बहुत पिछड़ा हुआ है और जिसमें 95 परसेंट आदिवासी बस्ती है और जिसका लगभग 50% बॉर्डर महाराष्ट्र से लगता है। जो शराब बेचने की पूरी परमिशन वाला राज्य है। फिर इस डांग जिले के बॉर्डर पर जो महाराष्ट्र राज्य से लगता है।पुलिस और फॉरेस्ट डिपार्टमेंट के चेक पोस्ट नाका भी हैं। हालांकि लोकल लोगों में चर्चा है कि गांधी के गुजरात के डांग जिले के पूरे इलाके में इंग्लिश और देसी शराब भी खुलेआम बिकती है। तब ये मिलती है या नहीं यह अलग बात है।लेकिन इसका एक सैंपल डांग जिले का हेडक्वार्टर आहवा नगर है।जहां डांग जिले के डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर,डिस्ट्रिक्ट सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस और दूसरे पुलिस या दूसरे डिपार्टमेंट के अधिकारी भी रहते हैं।इसके अलावा आहवा में एक आहवा टाउन पुलिस स्टेशन और एक डांग LCB पुलिस स्टेशन होने के बावजूद। इस आहवा कस्बे में हर दिन कहीं न कहीं कूड़े के ढेर पर अंग्रेजी शराब की बोतलें देखी जा रही हैं।तो फिर इसमें शर्म किसे है? यह एक सवाल खड़ा करता है। इसी तरह डांग जिले के पूर्वी बॉर्डर इलाके में धवली दौड़ और साम गहान गांव के इलाकों में कुछ तस्कर खुलेआम मटका जुआ खिलवा कर और जुए के धंधे के साथ-साथ अंग्रेजी शराब भी खुलेआम बेची जा रही है।फिर स्थानीय नेताओं का कहना है कि डांग प्रशासन को इस बारे में कुछ कदम उठाने और उचित कानूनी कार्रवाई करने की लोक चर्चित मांग उठीं है। गौरतलब हैं की लोगों द्वारा चर्चित हैं कि डांग जिले में पुलिस गांव में रेड डालकर देशी शराब के 1 या 2 लीटर शराब पकड़कर अपनी ड्युटी तो बजा लेते हैं पर क्या ये बड़ी मछली की तरह बड़ा शराब बेचने वाले बुटलेगर या जुआ खेल खेलने वाले क्यों पुलिस के हाथ नहीं आते ये भी एक बड़ा सवाल हैं। तब इस बारे में एक जागरूक नागरिक ने गुजरात के गृह विभाग को भी ध्यान दौराने की तजवीज सुरु की है की भी जानकारी मिली हैं।

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