डांग : डांग जिले के मुख्यालय आहवा शहर में आज सुबह शिकारी प्रजाति के आकर्षक Shikra (वैज्ञानिक नाम: Accipiter badius) का दुर्लभ दर्शन हुआ। शहर के एक शांत रिहायशी क्षेत्र में ऊंचे वृक्ष पर बैठे इस पक्षी को सबसे पहले स्थानीय युवाओं ने देखा। सूचना मिलते ही पक्षी प्रेमी और प्रकृति प्रेमी मौके पर पहुंचे तथा दूरबीन और कैमरे की सहायता से उसका अवलोकन कर तस्वीरें भी लीं।

शिकरा एक छोटा लेकिन अत्यंत फुर्तीला और तेज नजर वाला शिकारी पक्षी है। इसके शरीर का रंग धूसर-भूरा होता है। आंखें लालिमा लिए होती हैं तथा छाती पर हल्की आड़ी धारियां इसकी पहचान मानी जाती हैं। यह मुख्य रूप से छोटे पक्षियों, कीट-पतंगों और छिपकलियों का शिकार करता है।पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि डांग जैसे वनप्रधान क्षेत्र में शिकरा जैसे शिकारी पक्षियों की उपस्थिति पारिस्थितिकी तंत्र की मजबूती और जैव विविधता का सकारात्मक संकेत है।

ऐसे पक्षी प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।वन विभाग के अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की है कि वे ऐसे दुर्लभ पक्षियों को दूर से ही देखें, किसी प्रकार की छेड़छाड़ न करें तथा उनके प्राकृतिक आवास और पेड़ों का संरक्षण करें। आहवा में शिकरा के दर्शन से प्रकृति प्रेमियों में उत्साह का वातावरण है और युवाओं में पक्षी निरीक्षण के प्रति रुचि भी बढ़ती दिखाई दे रही है।

🏹 इतिहास में शिकरा का महत्व :
🦅 1. बाजीगरी परंपरा में उपयोग :- भारत तथा दक्षिण एशिया में राजवंशों के समय शिकारी पक्षियों को पालने और प्रशिक्षित करने की परंपरा प्रचलित थी। विशेष रूप से Akbar के शासनकाल में बाजीगरी एक राजशाही खेल माना जाता था। शिकरा जैसे छोटे, फुर्तीले और तेज नजर वाले पक्षियों को प्रशिक्षित कर छोटे शिकार के लिए उपयोग किया जाता था।
🏹 2. राजाशाही शिकार में भूमिका : –
राजाओं और जमींदारों द्वारा शिकार के दौरान शिकरा जैसे पक्षियों को छोड़ा जाता था, जो तेज उड़ान भरकर छोटे पक्षियों या अन्य जीवों का शिकार पकड़ लाते थे। उनकी तीव्र दृष्टि और चुस्ती उन्हें इस कार्य के लिए उपयुक्त बनाती थी।
📜 3. सांस्कृतिक और लोकपरंपरा में स्थान :-
प्राचीन लोककथाओं और लोकगीतों में शिकारी पक्षियों का उल्लेख मिलता है। शिकरा जैसे पक्षियों को साहस, चपलता और कौशल का प्रतीक माना जाता था।
⚖️ वर्तमान में कानूनी संरक्षण :-
आज के समय में भारत में Wildlife Protection Act 1972 के अंतर्गत शिकारी पक्षियों को पकड़ना, पालना या उनका व्यापार करना प्रतिबंधित है।
